एक बार एक गांव के लोगों ने कलिम को प्रवचन देने के लिए आमंत्रित किया। 
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कलिम की इच्छा नहीं थी पर लोगों के जोर देने पर वह बेमन से राजी हो गए। 
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कलिम गांव पहुंचे और मंच से बोले, ‘क्या आप जानते हैं कि मैं क्या बताने वाला हूं?’
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नहीं’, लोगों ने जवाब दिया।
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यह सुन कलिम नाराज हो गए। बोले, ‘जिन्हें ये भी नहीं पता कि मैं क्या बोलने वाला हूं, उनके सामने मेरी बोलने की कोई इच्छा नहीं है।’ और ऐसा कह कर वहां से चले गए।
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उपस्थित लोगों को थोड़ी शर्मिंदगी हुई और उन्होंने अगले दिन फिर से कलिम को बुलावा भेजा।
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इस बार भी कलिम ने वही प्रश्न दोहराया, ‘क्या आप जानते हैं, मैं क्या बताने वाला हूं?’ ‘
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हां’, भीड़ ने एक साथ जवाब दिया। ‘
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बहुत अच्छे! जब आप पहले से ही जानते हैं तो भला दोबारा बताकर मैं समय क्यों बर्बाद करूं।’,
ऐसा कहकर कलिम वहां से फिर निकल गए।
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अब लोगों को अपमान महसूस हुआ। उन्होंने फिर कलिम को आमंत्रित किया।
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इस बार भी कलिम ने वही प्रश्न किया, ‘क्या आप जानते हैं, मैं क्या बताने वाला हूं?’
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इस बार सभी ने पहले से योजना बना रखी थी इसलिए आधे लोगों ने ‘हां’ और आधे लोगों ने ‘ना’ में उत्तर दिया।
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कलिम: ठीक है, जो आधे लोग जानते हैं कि मैं क्या बताने वाला हूं, वे बाकी के आधे लोगों को बता दें। :
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फिर उस गांव में कभी किसी ने कलिम को प्रवचन देने के लिए नहीं बुलाया!



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